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SUPER 15 UP - TGT Hindi Test 277
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SUPER 15 UP - TGT Hindi Test 277
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  • Question 1/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दें।

    सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान दोनों का ही हाथ रहता है। धर्म ने मनुष्य के मन का सुधार किया है और विज्ञान ने संस्कृति को जीता है। धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म हृदय में पैदा होता है। विज्ञान भी सत्य को जानने में लगा रहता है। विज्ञान प्रकृति को जीतता है तथा धर्म सत्य, अहिंसा, परोपकार आदि से मन को जीतता है। अतः यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे। संसार के सभी लोगों को अपना भाई समझेंगे। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति से मानव का विकास होता रहेगा।

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    इस गद्यावतरण का उचित शीर्षक है:

    Solutions

    दिए गए गद्यांश का उचित शीर्षक सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान का योगदान

  • Question 2/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दें।

    सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान दोनों का ही हाथ रहता है। धर्म ने मनुष्य के मन का सुधार किया है और विज्ञान ने संस्कृति को जीता है। धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म हृदय में पैदा होता है। विज्ञान भी सत्य को जानने में लगा रहता है। विज्ञान प्रकृति को जीतता है तथा धर्म सत्य, अहिंसा, परोपकार आदि से मन को जीतता है। अतः यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे। संसार के सभी लोगों को अपना भाई समझेंगे। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति से मानव का विकास होता रहेगा।

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    संयम में रहने वाला व्यक्ति क्या कहलाता है?
    Solutions

    संयम में रहने वाला व्यक्ति निग्रही कहलाता है।

    निग्रही का अर्थ - निग्रह करनेवाला

  • Question 3/15
    1 / -0.25

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    निर्देश: गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दें।

    सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान दोनों का ही हाथ रहता है। धर्म ने मनुष्य के मन का सुधार किया है और विज्ञान ने संस्कृति को जीता है। धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म हृदय में पैदा होता है। विज्ञान भी सत्य को जानने में लगा रहता है। विज्ञान प्रकृति को जीतता है तथा धर्म सत्य, अहिंसा, परोपकार आदि से मन को जीतता है। अतः यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे। संसार के सभी लोगों को अपना भाई समझेंगे। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति से मानव का विकास होता रहेगा।

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    हम कब सारे संसार को अपना समझेंगे?
    Solutions

    * हम सारे संसार को अपना तब समझेंगे जब धर्म और विज्ञान मिलकर काम करेंगे।

    * यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे।

  • Question 4/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दें।

    सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान दोनों का ही हाथ रहता है। धर्म ने मनुष्य के मन का सुधार किया है और विज्ञान ने संस्कृति को जीता है। धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म हृदय में पैदा होता है। विज्ञान भी सत्य को जानने में लगा रहता है। विज्ञान प्रकृति को जीतता है तथा धर्म सत्य, अहिंसा, परोपकार आदि से मन को जीतता है। अतः यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे। संसार के सभी लोगों को अपना भाई समझेंगे। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति से मानव का विकास होता रहेगा।

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    धर्म, मन पर कैसे विजय प्राप्त करता है?
    Solutions

    * धर्म, मन पर अहिंसा, परोपकार और सत्य से विजय प्राप्त करता है।

    * धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं।

  • Question 5/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़ें और दिए गए प्रश्नों का सही उत्तर दें।

    सभ्यता और संस्कृति के विकास में धर्म और विज्ञान दोनों का ही हाथ रहता है। धर्म ने मनुष्य के मन का सुधार किया है और विज्ञान ने संस्कृति को जीता है। धर्म हमारे मन को बल देता है और जितने भी अच्छे गुण हैं वे सभी धर्म के कारण हैं। सत्य, अहिंसा, परोपकार, संयम आदि सभी अच्छे गुण धर्म के अंतर्गत आते हैं। धर्म हृदय में पैदा होता है। विज्ञान भी सत्य को जानने में लगा रहता है। विज्ञान प्रकृति को जीतता है तथा धर्म सत्य, अहिंसा, परोपकार आदि से मन को जीतता है। अतः यदि विज्ञान और धर्म मिलकर काम करें तो वह दिन दूर नहीं जब हम राज्यों और देशों के विचार को पीछे छोड़ देंगे और सारे संसार को अपना समझेंगे। संसार के सभी लोगों को अपना भाई समझेंगे। इस प्रकार सभ्यता और संस्कृति से मानव का विकास होता रहेगा।

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    'परोपकार' में उपसर्ग छाँटिए।
    Solutions

    * परोपकार में उपसर्ग और मूल शब्द पर + उपकार

    * परोपकार का अर्थ - दूसरों के हित का काम

    * उपसर्ग ऐसे शब्दांश जो किसी शब्द के पूर्व जुड़ कर उसके अर्थ में परिवर्तन कर देते हैं। उप (समीप) + सर्ग (सृष्टि करना) का अर्थ है - किसी शब्द के समीप कर नया शब्द बनाना।

  • Question 6/15
    1 / -0.25

    'बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता किस कवि के द्वारा रचित है?
    Solutions

    बच्चे काम पर जा रहे हैं' कविता में कवि राजेश जोशी ने बाल मजदूरी के विषय को आधार बनाकर बच्चों के बचपन को छीन जाने की व्यथा को अभिव्यक्ति दी है।

  • Question 7/15
    1 / -0.25

    उद्धव गोपियों को कौन-सा संदेश देता है?
    Solutions

    उद्धव ने गोपियों को कृष्ण के द्वारा भिजवाया गया योग संदेश दिया।

  • Question 8/15
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में कर्मधारय समास का उदाहरण है
    Solutions

    * दिए गए विकल्पों में से “नीलगगन” शब्द में कर्मधारय समास है शेष विकल्प असंगत है अत: सही उत्तर विकल्प b है

    * नील गगन का समास विग्रह - नीला है जो असमान (नीला -विशेषण और गगन - विशेष्य)

    * जिस समास का उत्तरपद प्रधान हो और पूर्वपद व उत्तरपद में विशेषण-विशेष्य अथवा उपमान-उपमेय का संबंध हो वह कर्मधारय समास कहलाता है।

    अन्य विकल्प -

    * पुस्तकालय का समास विग्रह  - पुस्तक का आलय (तत्पुरुष समास)

    * तिरंगा शब्द का समास विग्रह - तीन रंगो का समाहार (द्विगु समास)

    * गिरिधर शब्द का समास विग्रह - गिरि को धारण करने वाला है जो अर्थात् कृष्ण (बहुव्रीहि समास)

    अन्य तथ्य -

    समास का शाब्दिक अर्थ संक्षेप है, दो या दो से अधिक शब्दों के परस्पर मेल को समास कहते है।

    समास के प्रकार -

    1. अव्ययीभाव समास

    2. तत्पुरुष समास

    3. कर्मधारय समास

    4. द्वन्द्व समास

    5. द्विगु समास

    6. बहुव्रीहि समास

  • Question 9/15
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में कौन-सा असंगत है ?
    Solutions

    * दिए गए विकल्पों में “निजवाचक सर्वनाम” असंगत है क्योंकि निजवाचक सर्वनाम के अंतर्गत आप, अपना, स्वयं, ख़ुद आदि शब्द आते हैं।

    * निजवाचक सर्वनाम - जिन सर्वनाम शब्दों का प्रयोग वक्ता स्वयं के लिए करता है उन्हें निजवाचक सर्वनाम कहते हैं।

    अन्य विकल्प –

    1. पुरूषवाचक -मैं, तू, वह, हम, मैंने

    2. निजवाचक -आप

    3. निश्चयवाचक -यह, वह

    4. अनिश्चयवाचक -कोई, कुछ

    5. संबंधवाचक -जो, सो

    6. प्रश्नवाचक -कौन, क्या

    अन्य तथ्य –

    • जिन शब्दों का प्रयोग संज्ञा के स्थान पर किया जाता है उन्हें सर्वनाम कहते हैं।

    • सर्वनाम की संख्या 11 होती है।

    • जैसे - मै, तू, वह, आप, कोई, यह, ये, वे, हम, तुम, कुछ, कौन, क्या, जो, सो, उसका आदि सर्वनाम शब्द हैं।

  • Question 10/15
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में से कौन-सी कृति इलाचंद्र जोशी की नहीं है?
    Solutions

    'आस्था और सौंदर्य' इलाचंद्र जोशी(1902-1983) की कृति नहीं है।

    इलाचंद्र जोशी की प्रमुख रचनाएँ हैं- सन्यासी, त्याग का भोज, मणिमाला, पर्दे की रानी, प्रेत और छाया, निर्वासित, मुक्तिपथ, सुबह के भूले, जहाज का पंछी, जिप्सी, ऋतुचक्र, कवि की प्रेयसी आदि उनके प्रमुख उपन्यास हैं।

  • Question 11/15
    1 / -0.25

    अष्‍टछाप के कवियों का सही संगत वर्ग है:
    Solutions

    अष्टछाप की स्थापना विट्ठलनाथ ने 1565 ईस्वी में की थी।

    इसमें चार शिष्य वल्लभाचार्य के कुम्भनदास, सूरदास, परमानन्द दास, कृष्णदास

    चार शिष्य विट्ठलनाथ के गोविन्दस्वामी, छीतस्वामी, चतुर्भुज दास, नन्ददास

    अष्‍टछाप के कवियों का सही संगत वर्ग है - सूरदास, कुंभनदास, नन्‍ददास, कृष्‍णदास।

  • Question 12/15
    1 / -0.25

    सही वर्तनी वाले शब्द का चयन करें।
    Solutions

    उपरोक्त विकल्पों में ‘घराशायी’ वर्तनी के अनुसार शुद्ध है बाकी सभी शब्द वर्तनी के अनुसार गलत शब्द है।

    धराशायी का अर्थ - पृथ्वी पर लेटा हुआ

    अन्य तथ्य –

    वर्तनी का अर्थ : भाषा की वर्तनी का अर्थ उस भाषा में शब्दों को वर्णों से अभिव्यक्त करने की क्रिया को कहते हैं। लिखने की रीति को वर्तनी कहते हैं।

  • Question 13/15
    1 / -0.25

    दिये गये वाक्यांश के लिए एक शब्द दीजिये।

    अतिथि की सेवा करने वाला

    Solutions

    अतिथि की सेवा करने वाला” वाक्यांश के लिए एक शब्द “आतिथेय” है अन्य विकल्प दिए गए वाक्यांश के लिए असंगत है।

    अन्य विकल्प –

    आशुतोष का अर्थ - तुरंत प्रसन्न होनेवाला।

    सेवक का अर्थ - चाकर, परिचारक

  • Question 14/15
    1 / -0.25

    विदित ने ....... मित्रों से कहा कि ...... उदित की गेंद चाहिए। सही विकल्प का चयन कर रिक्त स्थानों की पूर्ति कीजिए।
    Solutions

    प्रस्तुत वाक्य में रिक्त स्थानों के लिए 'अपने, उसको'| सर्वाधिक उपयुक्त शब्द हैं। अतः पूर्ण वाक्य इस प्रकार होगा - विदित ने अपने मित्रों से कहा कि उसको उदित की गेंद चाहिए।

  • Question 15/15
    1 / -0.25

    निम्नलिखित में से कौन सा वाक्य 'कर्मवाच्य' का उदाहरण है?
    Solutions

    कपड़ा सिला जाता है। वाक्य 'कर्मवाच्य' का उदाहरण है

    अन्य विकल्प –

    रोगी से उठा नहीं जाता। - भाववाच्य

    बंटी ने पुस्तक पढ़ी। - कर्तवाच्य

    रोशन सामान खरीदने के लिए बाजार जाता है। - कर्तवाच्य

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