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Bihar Sec Teacher Hindi Test 285
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Bihar Sec Teacher Hindi Test 285
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  • Question 1/10
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    'छितवन की छाँह' के रचनाकार कौन हैं?
    Solutions

    छितवन की छाँह के रचयिता विद्यानिवास मिश्र हैं। यह निबंध संग्रह है जिसका प्रकाशन 1953 में हुआ।

    विद्यानिवास मिश्र की रचनाएँ -

    कितने मोरचे

    गांधी का करुण रस

    चिड़िया रैन बसेरा

    हल्दी धूप

    कदम की फूली डाल

    विद्यानिवास मिश्र के पुरस्कार -

    पद्मश्री -1988

    मूर्ति देवी पुरस्कार – 1989

    विश्व भारती सम्मान-1996

    साहित्य अकादमी का महत्तर सदस्यता सम्मान-1996

    पद्मभूषण – 1999

    मंगलाप्रसाद पारितोषिक – 2001

    अन्य विकल्प –

    हरिशंकर परसाई की रचनाएँ - जैसे उनके दिन फिरे, भोलाराम का जीव, रानी नागफनी की कहानी

    गुलाब राय की रचनाएँ - शांति धर्म, मैत्री धर्म , मन की बाते, अभिनव भारत के प्रकाश स्तम्भ, सत्य और स्वतंत्रता के उपासक

  • Question 2/10
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    कौन सा सही सुमेलित नहीं है?
    Solutions

    मृगावती के रचनाकार कुतुबन है।

    जिसमें चंद्रनगर के राजा गणपतिदेव के राजकुमार और कंचनपुर के राजा रूपमुरारि की कन्या मृगावती की प्रेम कथा का वर्णन है।

    मंझन, हिंदी सूफी प्रेमाख्यान परंपरा के कवि थे। मंझन की कृति "मधुमालती"

  • Question 3/10
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    'ए स्केच ऑफ हिंदी लिटरेचर' के लेखक हैं।
    Solutions

    'ए स्केच ऑफ हिन्दी लिटरेचर' के लेखक इडविन ग्रीव्ज है। इसका प्रकाशन 1918 में हुआ था।
    अन्य तथ्य - 
    हिंदी साहित्येतिहास के प्रमुख ग्रन्थ -
    लेखक       - इतिहास ग्रन्थ
    मिश्रबन्धु     - मिश्रबन्धु विनोद 
    पादरी एडसिन ग्रीब्ज - स्केच ऑफ़ हिंदी लिटरेचर 
    पादरी एफ. ई. के. ई. - ए हिस्ट्री ऑफ़ हिंदी लिटरेचर
    रामचन्द्र शुक्ल - हिंदी साहित्य का इतिहास 

  • Question 4/10
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    'द्विवेदी युग' नामकरण किया गया
    Solutions

    इस युग का नामकरण महावीर प्रदास द्विवेदी के नाम पर किया गया है इस युग में गद्य एवं पद्य दोनों ही प्रकार की काव्य रचनाओं में खड़ी बोली का प्रयोग होने लगा था।

    नामकरण -

    * डॉ. नगेन्द्र ने इस काल को जागरण सुधार काल के नाम से पुकारा है।

    * महावीर प्रसाद द्विवेदी ने सरस्वती पत्रिका के माध्यम से खड़ी बोली हिन्दी का परिष्कार किया। इसलिए इस युग को परिष्कार काल भी कहते हैं।

    * आचार्य शुक्ल ने इस युग को हिन्दी काव्य की नयी धारा नाम दिया।

  • Question 5/10
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    इनमें से कौन ‘रात का रिपोर्टर’ उपन्यास के रचयिता हैं?
    Solutions

    निर्मल वर्मा ने रात का रिपोर्टर उपन्यास की रचना 1989 में की थी।

    निर्मल वर्मा द्वारा रचित अन्य उपन्यास हैं- वे दिन(1964), लाल टीन की छत(1974), एक चिथड़ा सुख(1979), अंतिम अरण्य(2000) आदि।

    'रात का रिपोर्टर' उपन्यास आपातकाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है हालांकि आपात स्थिति के संकेत उपन्यास में अस्पष्ट है।

  • Question 6/10
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    विश्व इतिहास की झलक’ – यह किसकी रचना है?
    Solutions

    विश्व इतिहास की झलक पुस्तक के रचेता पं. जवाहरलाल नेहरु है जो भारत के प्रधान मंत्री भी रहे, इस पुस्तक में नेहरु जी द्वारा भारत के भूगोल और राजनीति को चित्रित किया गया है।

  • Question 7/10
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    निम्नलिखित में से मैथिलीशरण गुप्त की कौन-सी रचना नायिका प्रधान नहीं है?
    Solutions

    पंचवटी नायक प्रधान रचना है। जिसके नायक लक्ष्मण है।
    द्विवेदी युगीन कवि मैथिलीशरण गुप्त की रचनाएँ - पंचवटी (1925), साकेत (1931), यशोधरा (1932) तथा विष्ण प्रिया (1957) आदि  
    यशोधरा में महात्मा गौतम बुद्ध की पत्नी का वर्णन नायिका के रूप में मिलता है।

    साकेत में लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला का वर्णन नायिका के रूप में मिलता है।
    विष्णुप्रिया पश्चिम बंगाल के प्रसिद्ध संत चैतन्य महाप्रभु की पत्नी विष्णुप्रिया का नायिका के रूप में वर्णन किया है।

  • Question 8/10
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    भंवर गीत" किसकी रचना है ?
    Solutions

    भंवर गीत की रचना अष्टछाप के कवि नंददास ने की थी यह भ्रमरगीत परम्परा का उत्कृष्ट ग्रंथ है। नन्ददास की अन्य प्रमुख रचनाएं - अनेकार्थ मंजरी, रस मंजरी, रूप मंजरी , रास पंचाध्यायी

  • Question 9/10
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    ले चल मुझे भुलावा देकर, मेरे नाविक धीरे-धीरे।" पंक्ति के रचयिता हैं?
    Solutions

    ले ले चल मुझे भुलावा देकर कविता छायावादी प्रेम सौंदर्य के महान कवि जयशंकर प्रसाद द्वारा रचित है। साहित्यिक जगत में प्रसाद जी एक सफल व श्रेष्ठ कवि, नाटककार कथाकार व निंबंध लेखक के रूप में विख्यात रहे है।

    व्याख्या - कवि ईश्वर को नाविक के रूप में बताते हुए कहते हैं कवि ईश्वर से कहते हैं हे ईश्वर मेरे जीवन की नैया को धीरे धीरे इस सागर की लहरों से दूर ले चल मुझे एक ऐसी जगह ले चल जहां सत्य प्रेम का आवास हो जहां दूर-दूर तक कोई आवाज ना हो कानों में एक मधुर आवाज गूंजती रहे मुझे एक ऐसी जगह ले जा। जहां जीवन छाया के समान होकर कोमलता का भाव ले ले। और नेत्र आसमान के नीले रंग के समान शांत हो जाए। आगे कवि कहते हैं हे ईश्वर मुझे एक ऐसी दुनिया में ले चले जहां माधुर्य का वातावरण हो। जहां सुख दुख का सत्य वातावरण हो। जहां श्रम में भी आनंद की प्राप्ति हो जहां जागरुकता की ज्योति दिखाती हो। कवि संसार की संसरिकता से उब चुका है। उसे संसार में कहीं भी कोई तालमेल नहीं दिखाई दे रहा है। कभी अपनी जीवन रूपी नहीं आ ईश्वर के हाथ में देकर उन्हें कैसे जाने के लिए कह रहे हैं जहां इस सांसरिकता से मुक्ति मिल जाए।

  • Question 10/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: गद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए -

    अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है, हालांकि हरेक देश के पास इसकी कोई--कोई आधिकारिक व्याख्या जरूर है कि वे कैसे और किन सन्दर्भों में आधुनिक हो रहे हैं, लेकिन इस बारे में मेरा कहना है कि आधुनिकता के अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है, समझने के लिए जरूरी है कि आप अपने अन्दर झाँक सकें, इससे आपको पता चलेगा कि आधुनिकता की राह पर बढ़ने के लिए समाज को किन चीजों की जरूरत होती है, बेशक, आज हर कोई मॉडर्न होना चाहता है, लेकिन आधुनिकता की राह उतनी स्पष्ट नहीं है, जितनी वह मानी जाती है, इसीलिए मैं यह बात बार-बार कहता हूँ कि पश्चिमी समाज कभी-कभी आधुनिक नहीं रहे, पश्चिम के पास एकमात्र उल्लेखनीय चीज है साइंस, जिसमें उसने तरक्की की लेकिन जिन साइंटिस्टों के बलबूते वहाँ आधुनिकता का परचम लहराया जाता है, खुद वे साइंटिस्ट अपने कल्वर में उलझे रहते हैं, उनका यह कल्चर, आधुनिकता का झण्डाबरदार नहीं है, यह भी नहीं कहा जा सकता है कि उनके कल्वर पर दूसरी संस्कृतियों और लोकाचारों का असर नहीं हुआ होगा, अगर यह असर हुआ है तो सिर्फ वही आधुनिक क्यों कहा जाए?

    (ब्रूनो लातूर-फ्रेंच सोशल साइंटिस्ट)

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    लेखक ने किस बात की अस्पष्टता की ओर संकेत किया है?

    Solutions

    गद्यांश की उक्त पंक्तियों अभी भी इस बारे में बहुत कम जानकारी है कि आधुनिक कही जाने वाली आज की दुनिया आखिर कैसे संचालित हो रही है से यह स्पष्ट होता है कि लेखक ने आधुनिकता की सही व्याख्या की अस्पष्टता की ओर संकेत किया है।

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