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SUPER 15 UP - TGT Hindi Test 396
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  • Question 1/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए।

    चींटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होतीं
    दौड़ती भागती
    एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं
    जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
    जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चींटियों से पहले।
    संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
    रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
    दोस्त और दुश्मन के चेहरे
    बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार
    नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध
    फिर से एकजुट होते हुए।।

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    चींटियाँ आपस में बातचीत कैसे करती हैं?
  • Question 2/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए।

    चींटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होतीं
    दौड़ती भागती
    एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं
    जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
    जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चींटियों से पहले।
    संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
    रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
    दोस्त और दुश्मन के चेहरे
    बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार
    नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध
    फिर से एकजुट होते हुए।।

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    ‘ईर्ष्यालु’ किसे कहा जाता है?
  • Question 3/15
    1 / -0.25

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    निर्देश: नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए।

    चींटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होतीं
    दौड़ती भागती
    एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं
    जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
    जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चींटियों से पहले।
    संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
    रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
    दोस्त और दुश्मन के चेहरे
    बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार
    नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध
    फिर से एकजुट होते हुए।।

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    चींटियों के स्वभाव में नहीं हैं।
  • Question 4/15
    1 / -0.25

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    निर्देश: नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए।

    चींटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होतीं
    दौड़ती भागती
    एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं
    जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
    जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चींटियों से पहले।
    संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
    रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
    दोस्त और दुश्मन के चेहरे
    बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार
    नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध
    फिर से एकजुट होते हुए।।

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    बिखरी हुई चींटियाँ फिर से एकजुट कैसे होती हैं?
  • Question 5/15
    1 / -0.25

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    निर्देश: नीचे दिए गए पद्यांश को पढ़कर निम्नलिखित प्रश्नों में सबसे उचित विकल्प चुनिए।

    चींटियाँ ईर्ष्यालु नहीं होतीं
    दौड़ती भागती
    एक-दूसरे को संदेश पहुँचातीं
    जीवन को परखती पहुँचती हैं वहाँ,
    जहाँ कोई नहीं पहुँचा कभी चींटियों से पहले।
    संकेतों में करती हैं, वे शब्द संधान
    रास्ता नहीं भूलतीं कभी स्मृति में रखती हैं संजोकर
    दोस्त और दुश्मन के चेहरे
    बिखरती हैं कभी-कभार वे मगर हर बार
    नए सिरे से टटोलती हैं वे पूर्वजों द्वारा छोड़ी गई गंध
    फिर से एकजुट होते हुए।।

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    मित्र और शत्रु के चेहरों को चींटियाँ कहा रखती है?
  • Question 6/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    आध्यात्मिक गुरु एक्हार्ट टॉल अपनी किताब 'दि पावर ऑफ नाऊ में लिखते हैं कि चेतना रूप और आकार का ऐसा स्वांग रचती है, जिसमें वह स्वयं को खो देती है। मानव सभ्यता के जीवने के लिए ज़रूरी है कि हम चेतना को अगले स्तर तक ले जाएँ। इतिहास में मिनांडर और बौद्ध गुरु नागसेन, नागार्जुन की एक महान चर्चा का विवरण मिलता है। राजा और दार्शनिक के बीच के संवाद में कर्म, नाम, रूप, निर्वाण, पुनर्जन्म, आत्मा वगैरह पर चर्चा की गई है। नागसेन से मिनांडर पूछते हैं कि बुद्ध कहाँ हैं? नागसेन कहते हैं कि वह परम निर्वाण को प्राप्त हो गए। मिनांडर पूछते हैं कि क्या निर्वाण को प्राप्त होने के बाद भी अस्तित्व रहता है? गुरु नागसेन उल्टे उन्हीं से पूछते हैं कि क्या शांत हो चुकी अग्नि में लपट शेष रहती है? क्या उसे देखा जा सकता है? इस पर मिनांडर कहते हैं कि आपका अर्थ है कि तब बुद्ध नहीं हैं? बौद्ध गुरु कहते हैं कि अग्नि का अस्तित्व समाप्त हो सकता है? नहीं। ठीक उसी प्रकार बुद्ध हर जगह हैं। बुद्धत्व की संभावनाएं हर समय हैं। हर जीव की चेतना में बुद्धत्व है। हमारी चेतना का जागरण ही उसका साक्षात्कार कर सकता है।

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    'निर्वाण' से अभिप्राय है

  • Question 7/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    आध्यात्मिक गुरु एक्हार्ट टॉल अपनी किताब 'दि पावर ऑफ नाऊ में लिखते हैं कि चेतना रूप और आकार का ऐसा स्वांग रचती है, जिसमें वह स्वयं को खो देती है। मानव सभ्यता के जीवने के लिए ज़रूरी है कि हम चेतना को अगले स्तर तक ले जाएँ। इतिहास में मिनांडर और बौद्ध गुरु नागसेन, नागार्जुन की एक महान चर्चा का विवरण मिलता है। राजा और दार्शनिक के बीच के संवाद में कर्म, नाम, रूप, निर्वाण, पुनर्जन्म, आत्मा वगैरह पर चर्चा की गई है। नागसेन से मिनांडर पूछते हैं कि बुद्ध कहाँ हैं? नागसेन कहते हैं कि वह परम निर्वाण को प्राप्त हो गए। मिनांडर पूछते हैं कि क्या निर्वाण को प्राप्त होने के बाद भी अस्तित्व रहता है? गुरु नागसेन उल्टे उन्हीं से पूछते हैं कि क्या शांत हो चुकी अग्नि में लपट शेष रहती है? क्या उसे देखा जा सकता है? इस पर मिनांडर कहते हैं कि आपका अर्थ है कि तब बुद्ध नहीं हैं? बौद्ध गुरु कहते हैं कि अग्नि का अस्तित्व समाप्त हो सकता है? नहीं। ठीक उसी प्रकार बुद्ध हर जगह हैं। बुद्धत्व की संभावनाएं हर समय हैं। हर जीव की चेतना में बुद्धत्व है। हमारी चेतना का जागरण ही उसका साक्षात्कार कर सकता है।

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    'बुद्धत्व' से अभिप्राय है
  • Question 8/15
    1 / -0.25

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    Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    आध्यात्मिक गुरु एक्हार्ट टॉल अपनी किताब 'दि पावर ऑफ नाऊ में लिखते हैं कि चेतना रूप और आकार का ऐसा स्वांग रचती है, जिसमें वह स्वयं को खो देती है। मानव सभ्यता के जीवने के लिए ज़रूरी है कि हम चेतना को अगले स्तर तक ले जाएँ। इतिहास में मिनांडर और बौद्ध गुरु नागसेन, नागार्जुन की एक महान चर्चा का विवरण मिलता है। राजा और दार्शनिक के बीच के संवाद में कर्म, नाम, रूप, निर्वाण, पुनर्जन्म, आत्मा वगैरह पर चर्चा की गई है। नागसेन से मिनांडर पूछते हैं कि बुद्ध कहाँ हैं? नागसेन कहते हैं कि वह परम निर्वाण को प्राप्त हो गए। मिनांडर पूछते हैं कि क्या निर्वाण को प्राप्त होने के बाद भी अस्तित्व रहता है? गुरु नागसेन उल्टे उन्हीं से पूछते हैं कि क्या शांत हो चुकी अग्नि में लपट शेष रहती है? क्या उसे देखा जा सकता है? इस पर मिनांडर कहते हैं कि आपका अर्थ है कि तब बुद्ध नहीं हैं? बौद्ध गुरु कहते हैं कि अग्नि का अस्तित्व समाप्त हो सकता है? नहीं। ठीक उसी प्रकार बुद्ध हर जगह हैं। बुद्धत्व की संभावनाएं हर समय हैं। हर जीव की चेतना में बुद्धत्व है। हमारी चेतना का जागरण ही उसका साक्षात्कार कर सकता है।

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    बुद्धत्व के साक्षात्कार का माध्यम है-
  • Question 9/15
    1 / -0.25

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    Direction: नीचे दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    आध्यात्मिक गुरु एक्हार्ट टॉल अपनी किताब 'दि पावर ऑफ नाऊ में लिखते हैं कि चेतना रूप और आकार का ऐसा स्वांग रचती है, जिसमें वह स्वयं को खो देती है। मानव सभ्यता के जीवने के लिए ज़रूरी है कि हम चेतना को अगले स्तर तक ले जाएँ। इतिहास में मिनांडर और बौद्ध गुरु नागसेन, नागार्जुन की एक महान चर्चा का विवरण मिलता है। राजा और दार्शनिक के बीच के संवाद में कर्म, नाम, रूप, निर्वाण, पुनर्जन्म, आत्मा वगैरह पर चर्चा की गई है। नागसेन से मिनांडर पूछते हैं कि बुद्ध कहाँ हैं? नागसेन कहते हैं कि वह परम निर्वाण को प्राप्त हो गए। मिनांडर पूछते हैं कि क्या निर्वाण को प्राप्त होने के बाद भी अस्तित्व रहता है? गुरु नागसेन उल्टे उन्हीं से पूछते हैं कि क्या शांत हो चुकी अग्नि में लपट शेष रहती है? क्या उसे देखा जा सकता है? इस पर मिनांडर कहते हैं कि आपका अर्थ है कि तब बुद्ध नहीं हैं? बौद्ध गुरु कहते हैं कि अग्नि का अस्तित्व समाप्त हो सकता है? नहीं। ठीक उसी प्रकार बुद्ध हर जगह हैं। बुद्धत्व की संभावनाएं हर समय हैं। हर जीव की चेतना में बुद्धत्व है। हमारी चेतना का जागरण ही उसका साक्षात्कार कर सकता है।

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    गद्यांश में किसके अस्तित्व के समाप्त होने की चर्चा की गई है?
  • Question 10/15
    1 / -0.25

    कवि कालिदास की 'अभिज्ञान शाकुन्तलम' का हिन्दी अनुवाद किसने किया ?
  • Question 11/15
    1 / -0.25

    निम्न में से असत्य कथन है - 
  • Question 12/15
    1 / -0.25

    निम्न में से अनमेल विवाह की समस्याओं को रेखांकित करने वाला उपन्यास है।
  • Question 13/15
    1 / -0.25

    नीचे दी गई बोलियों में से खड़ी बोली कौन सी है ?
  • Question 14/15
    1 / -0.25

    संध्या और रात्रि का समय के लिए सर्वाधिक उपयुक्त एक शब्द है।
  • Question 15/15
    1 / -0.25

    'हिंदी भाषी जनता का प्रतिनिधि कवि' किस कवि को कहा गया है?
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