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हिंदी व्याकरण पर हिंदी Test 400
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हिंदी व्याकरण पर हिंदी Test 400
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  • Question 1/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: प्रस्तुत पंक्ति में कौन सा रस है ?

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    "जसोदा हरि पालने झ्लावें।
    हलरावें दुलरावें मलरावें, जोई-सोई कछु गावें"
    Solutions
    प्रस्तुत पंक्ति में वात्सल्य रस है | क्योंकि इसमें कृष्ण के प्रति यशोदा की ममता का वर्णन किया गया है ।
    वात्सल्य रस:-इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।
  • Question 2/10
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    Directions For Questions

    प्रस्तुत पंक्तियों में कौन-सा छंद है?

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    "इहि विधि राम सबहिं समुझावा
    गुरु पद पदुम हरषि सिर नावा।"
    Solutions
    चौपाई छंद: यह एक मात्रिक छंद है। इसमें चार चरण होते हैं। प्रत्येक चरण में16 मात्राएँ होती है। चरण के अंत में चरण के अंत में दया (। ऽ) नहीं आती है।
    उदाहरण:
    ll ll Sl lll llSS
    "इहि विधि राम सबहिं समुझावा
    गुरु पद पदुम हरषि सिर नावा।"
  • Question 3/10
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    किस रस को 'रसराज' की उपाधि दी गई है?

    Solutions
    • श्रृंगार रस को रसराज कहा गया है।
    • श्रृंगार रस का स्थाई भाव रति होता है।
    • श्रृंगार रस रस दो प्रकार के होते हैं 1- संयोग श्रृंगार रस 2-वियोग श्रृंगार रस
    • संयोग श्रृंगार - जब नायक नायिका के परस्पर मिलन, स्पर्श, आलिंगन, वार्तालाप आदि का वर्णन होता है तब वहां पर संयोग श्रृंगार रस होता है।
    • वियोग श्रृंगार रस - जहां पर नायक-नायिका का परस्पर प्रबल प्रेम हो लेकिन मिलन न हो अर्थात नायक-नायिका के वियोग का वर्णन हो वहां पर वियोग रस होता है।

    अन्य विकल्प –

    क्रमांक

    रस का प्रकार    

     स्थायी भाव

    1.

    श्रृंगार रस                     

     रति

    2.

    हास्य रस                     

     हास

    3.

    करुण रस                     

     शोक

    4.

    रौद्र रस               

     क्रोध

    5.

    वीर रस               

     उत्साह

    6.

    भयानक रस            

     भय

    7.

    वीभत्स रस              

     घृणा/ जुगुप्सा

    8.

    अद्भुत रस             

     आश्चर्य

    9.

    शांत रस               

     निर्वेद

    अन्य तथ्य –

    • रस का शाब्दिक अर्थ है – आनंद।
    • काव्य को पढने व सुनने से जो आनंद प्राप्त होता है, रस कहलाता है।
    • रस को 'काव्य की आत्मा' माना जाता है।
  • Question 4/10
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    शोक’ किस रस का स्थायी भाव है?
    Solutions
    करुण रस का स्थायी भाव शोक है।
    शान्त रस का स्थायी भाव निर्वेदहै।  
    हास्य रस का स्थायी भाव ह्नास है।
    वीर रस का स्थायी भाव उत्साह है।
  • Question 5/10
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    Directions For Questions

    निम्न में से कौनसा/से जोड़े सही सुमेलित हैं?

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    रस का नाम         स्थाई भाव
    A) करुण             विस्मय
    B) अद्भूत            शोक 
    C) वीर               उत्साह
    D) हास्य              हास
    Solutions
    1. श्रृंगार--रति
    2. हास्य---हास
    3. करुण--शोक
    4. रौद्र---क्रोध
    5. वीर--उत्साह
    6. भयानक---भय
    7. वीभत्स---जुगुप्सा
    8. अद्भुत---विस्मय
    9. शांत---निर्वेद
    10. वात्सल्य---वात्सलता
  • Question 6/10
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    निम्न में से सही मिलान कीजिए -

       रस         स्थायी भाव 
    a.वीर         1.उत्साह
    b.अदभुत     2.जुगुप्सा
    c.वीभत्स      3.विस्मय
    d.भयानक    4.भय
    Solutions
    रस - रस का शाब्दिक अर्थ है 'आनन्द'। काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनन्द कीअनुभूति होती है, उसे 'रस' कहा जाता है।
    रस - स्थायी भाव
    शृंगार - रति
    हास्य - हास
    रौद्र - क्रोध
    करुण - शोक
    वीर - उत्साह
    अदभुत - विस्मय
    वीभत्स - जुगुप्सा (घृणा)
    भयानक - भय
    शान्त - निर्वेद
  • Question 7/10
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    ‘चौपाई’ छन्द के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
    Solutions
    चौपाई मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के 16 मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधार पर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।
  • Question 8/10
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    वीभत्स रस का स्थायी भाव है। 
    Solutions
    वीभत्स रस का स्थायी भाव जुगुप्सा है।  जहाँ घृणित वस्तु को देखकर या सुनकर मन में उत्पन्न होने वाली घृणा को वीभत्स रस कहते हैं। 
  • Question 9/10
    1 / -0.25

    “मेघमय आसमान से उतर रही है संध्या सुंदरी धीरे धीरे“ प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है।
    Solutions
    मानवीकरण अलंकार - जहाँ जड़ वस्तुओं या प्रकृति पर मानवीय चेष्टाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
    उदाहरण-
    फूल हंसे कलियां मुसकाईं।
    यहाँ फूलों का हँसना, कलियों का मुस्कराना मानवीय चेष्टाएँ हैं। अत: मानवीकरण अलंकार है।
    अलंकार - अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है  आभूषण और कार का अर्थ है 'सुसज्जित करने वाला'। जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग में लाती हैं उसी प्रकार भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है, अर्थात जो शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं।
  • Question 10/10
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    छंद का सर्वप्रथम उल्लेख किस वेद में मिलाता है?
    Solutions

    छंद का सर्वप्रथम उल्लेख 'ऋग्वेद' में मिलता है।
    छंद की परिभाषा होगी 'वर्णों या मात्राओं के नियमित संख्या के विन्यास से यदि आह्वाद पैदा हो, तो उसे छंद कहते हैं।

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