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शिक्षण शास्त्र पर हिंदी Test 404
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शिक्षण शास्त्र पर हिंदी Test 404
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    किस प्रकार के प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते?

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    पाठ पर आधारित तथ्यात्मक प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक नहीं होते क्योंकि ऐसे प्रश्नों के उत्तर बच्चें सीधे पाठ्य-पुस्तक से याद करके ज्यों का त्यों दे देते हैं।

    अनुमानपरक प्रश्न, कल्पनापरक प्रश्न और चिन्तनपरक प्रश्न बच्चों की भाषागत समझ का आकलन करने में अधिक सहायक होते हैं।

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    भाषा-शिक्षण में शब्दार्थ पर अधिक बल नहीं देना चाहिए, क्योंकि-
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    भाषा-शिक्षण में शब्दार्थ पर अधिक बल नहीं दिया जाता क्योंकि बच्चे सन्दर्भ के अनुसार अनुमान लगाते हुए अर्थ ग्रहण करते हैं।

    भाषा शिक्षण का संबंध केवल भाषा के सीखने-सिखाने तक ही सीमित नहीं है बल्कि उसका राष्ट्र, समाज और शिक्षा से भी गहरा संबंध है।

  • Question 3/10
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    पठन-कुशलता का मूल्यांकन करने के लिए आप क्या करेंगे?
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    पठन-कुशलता का मूल्यांकन करने के लिए अधयापक पढ़ी गई सामग्री से प्रश्न बनवाएंगे, जिससे शिक्षक को यह जानने का अवसर मिलता है कि बच्चों ने पाठ को कितनी गहराई से समझा है।

  • Question 4/10
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    भाषा-शिक्षण के सन्दर्भ में कौनसा कथन सही नहीं है?
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    भाषा की कक्षा में बच्चों की मातृभाषा का प्रयोग नहीं होना चाहिए, भाषा की कक्षा में एक भाषा को मानक मानकर पढ़ाना चाहिए क्योंकि विद्यालय में अनेक भाषा के बच्चे पढ़ने आते हैं। प्रत्येक की अलग-अलग मातृभाषा होती है अतः सभी की मातृभाषा में पढ़ाना यह उचित नहीं है।

  • Question 5/10
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    बोलना-कौशल के विकास के लिए सबसे अधिक महत्वपूर्ण सिद्ध हो सकता है-
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    बोलना कौशल के विकास के लिए सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है परस्पर वार्तालाप

    वाचन कौशल -

    छात्रों को शुद्ध उच्चारण, उचित स्वर, उचित गति के साथ बोलना सिखाना।

    छात्रों को निस्संकोच होकर अपने विचार व्यक्त करने के योग्य बनाना।

    छात्र में स्वाभाविक ढंग से परस्पर वार्तालाप करने की आदत विकसित करना।

    छात्रों को धाराप्रवाह बोलने के योग्य बनाना।

    अन्य तथ्य

    श्रुतलेखन - श्रुतलेखन का अर्थ है 'सुने हुए को लिखना' या 'सुनकर लिखना' 'श्रुत' का अर्थ होता है,'सुना हुआ' इस विधि में एक व्यक्ति बोलता है तथा दूसरा सुन कर उसे लिखता है। विद्यालयों में श्रुतलेखन का उपयोग वर्तनी सुधारने हेतु किया जाता है।

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    भाषा-अर्जन और भाषा-अधिगम के सन्दर्भ में कौन सा कथन सही नहीं है?
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    भाषा -अर्जन और भाषा-अधिागम में केवल यह सही नहीं है कि भाषा केवल रोजगार प्राप्त करने के लिए सीखी जाती है। भाषा शिक्षा का आधार है, भाषा वाक्यों की क्रमबद्ध उपज कही जा सकती है।

    अर्जन अर्जन एक ऐसी प्रक्रिया है। जिसके अंतर्गत हम अपने आस पास के वातावरण और माता पिता सम्पर्क में रहकर भाषा को सीखते है। यह एक प्राकृतिक प्रकिया है। इसके लिए कोई अन्य साधन की आवश्यकता नहीं पड़ती है।

    अधिगम - हिंदी भाषा में अधिगम का अर्थ सीखना अथवा जानना होता है, इसलिए यह शिक्षण का आधार है। मनुष्य जन्म के बाद ही सीखना आरंभ कर देता है और मृत्यु तक चलता है। अतः यह जीवन भर चलनेवाली वह मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया है जो मनुष्य को प्रतिदिन नया अनुभव तथा ज्ञान प्रदान करता है। जितना अधिक मनुष्य सीखने का चेष्टा करता है, उतना ही अधिक उसका अधिगम में विकास होता है।

  • Question 7/10
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    विशेष क्षमता वाले बच्चों की कक्षा में लेखन-कौशल के अभ्यास के लिए महत्वपूर्ण है-
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    विशेष क्षमता वाले बच्चों की कक्षा में लेखन-कौशल के अभ्यास के लिए विचारों की मौलिकता आवश्यक है। रचना भावों एवं विचारों की कलात्मक अभिव्यक्ति है। छात्र को लिखना सिखाने का प्रमुख उद्देश्य उन्हें अपने विचारों और अनुभवों को प्रभावशाली ढंग से लिखित रुप में अभिव्यक्त करने का शिक्षण देना है।

    बच्चों की लेखन क्षमता का आकलन उसकी विचार क्षमता के आधार पर करना चाहिए कि वह अपने विचार किस प्रकार व्यक्त कर रहा है।

    लेखन कौशक के उद्देश्य

    भाषा शैली प्रभवी बनाना

    लेखन में प्रवाह विकसित करना

    भाषा एवं साहित्य का विकास करना

    भाषा पर अच्छा अधिकार बनाना

    छात्रों में लिखने के प्रति रूचि जाग्रतकरना

    मातृभाषा को शुद्ध रूप में लिखने की क्षमता का ज्ञान

  • Question 8/10
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    भाषा-शिक्षण में सहायक है-
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    भाषा प्रयोग एक कला है। शुद्ध उच्चारण, स्वच्छ शुद्ध लेखन, वाचन में सन्तुलित गति, शब्दों का बाहुल्य वाक्य संरचना आदि बातों का ज्ञान भाषा सीखने के लिए आवश्यक है। भाषा के शिक्षक का कर्त्तव्य है कि वह छात्रों को शुद्ध पढ़ने, लिखने बोलने आदि में प्रवीण बनाये उन्हें भाषा के गलत प्रयोगों अभ्यास से बचाये।

    भाषा शिक्षण का मूल उद्देश्य छात्रों में सभी भाषा कौशलों में निपुणता हासिल करवाना है, जिससे वे भाषा का प्रभावी और संदर्भयुक्त प्रयोग कर सकें।

  • Question 9/10
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    अन्य विषयों की कक्षाएं की भाषा-अधिगम में सहायता करती हैं, क्योंकि-
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    अन्य विषयों की कक्षा में भाषा अधिगम में सहायता करती है क्योंकि अन्य विषयों को पढ़ने पर वैविघ्यपूर्ण भाषा प्रयोग के अनेक अवसर उपलब्ध होते हैं।

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    मौन पठन में मुख्यतः-
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    मौन पाठ में मुख्यतः विद्यार्थियों को कम से कम समय में अधिक से अधिक सामग्री को आत्मसात् करने का प्रयास किया जाता है।

    मौन पठन - लिखित सामग्री को मन ही मन बिना आवाज निकाले पढ़ना मौन पठन कहलाता है।

    मौन वाचन -

    1. द्रुत गति से पठन का अभ्यास करना।

    2. छात्रों की बोध शक्ति विकसित करना।

    3. छात्रों में स्वाध्याय की आदत विकसित करना।

    4. छात्रों मे सोच, मनन, तर्क करने की शक्ति बढ़ाना।

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