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SUPER 15 UP - TGT Hindi Test 407
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SUPER 15 UP - TGT Hindi Test 407
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  • Question 1/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम

    सह धूप-प्यास, पानी पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर

    सौभाग्य न सब दिन सोता है,

    देखें, आगे क्या होता है

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,

    भगवान हस्तिनापुर आये,

    पांडव का संदेशा लाये,

    दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो

    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम

    हम वहीं खुशी से खायेंगे

    परिजन पर असि न उठायेंगे।

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    सौभाग्य न सब दिन सोता है,’ पंक्ति से कवि का तात्पर्य है -
    Solutions
    सौभाग्य अर्थात् किस्मत समयानुसार बदलती है, दुःख के दिन सदैव नहीं रहते हैं।
  • Question 2/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम

    सह धूप-प्यास, पानी पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर

    सौभाग्य न सब दिन सोता है,

    देखें, आगे क्या होता है

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,

    भगवान हस्तिनापुर आये,

    पांडव का संदेशा लाये,

    दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो

    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम

    हम वहीं खुशी से खायेंगे

    परिजन पर असि न उठायेंगे।

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    कवि कौन से भगवान के हस्तिनापुर जाने को वर्णित कर रहा है?
    Solutions
    महाभारत में भगवान कृष्ण का ही वर्णन है, कविता कौरव, पांडव को लेकर ही वर्णित है। अतः श्रीकृष्ण भगवान से ही तात्पर्य है।
  • Question 3/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम

    सह धूप-प्यास, पानी पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर

    सौभाग्य न सब दिन सोता है,

    देखें, आगे क्या होता है

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,

    भगवान हस्तिनापुर आये,

    पांडव का संदेशा लाये,

    दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो

    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम

    हम वहीं खुशी से खायेंगे

    परिजन पर असि न उठायेंगे।

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    केवल पाँच ग्राम’ से क्या आशय है?
    Solutions
    पाँडव पूरे राज्य की इच्छा न कर केवल पाँच गाँव मांग कर भी प्रसन्न थे, कवि का आशय पूरे हस्तिनापुर में से केवल पाँच गाँवों से है।
  • Question 4/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम

    सह धूप-प्यास, पानी पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर

    सौभाग्य न सब दिन सोता है,

    देखें, आगे क्या होता है

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,

    भगवान हस्तिनापुर आये,

    पांडव का संदेशा लाये,

    दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो

    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम

    हम वहीं खुशी से खायेंगे

    परिजन पर असि न उठायेंगे।

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    ‘‘दो न्याय अगर तो आधा दो पर,’’ पंक्ति से क्या निष्कर्ष निकलता है?
    Solutions
    न्यायोचित दृष्टि से पाँडव सम्पूर्ण राज्य के आधे भाग के अधिकारी थे, क्योंकि धृतराष्ट्र व पांडु दो भाई थे, कौरव धृतराष्ट्र और पांडव, पाण्डु के संतान थे।
  • Question 5/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    वर्षों तक वन में घूम-घूम, बाधा-विघ्नों को चूम-चूम

    सह धूप-प्यास, पानी पत्थर, पांडव आये कुछ और निखर

    सौभाग्य न सब दिन सोता है,

    देखें, आगे क्या होता है

    मैत्री की राह बताने को, सबको सुमार्ग पर लाने को,

    भगवान हस्तिनापुर आये,

    पांडव का संदेशा लाये,

    दो न्याय अगर तो आधा दो, पर इसमें भी यदि बाधा हो

    तो दे दो केवल पाँच ग्राम, रखो अपनी धरती तमाम

    हम वहीं खुशी से खायेंगे

    परिजन पर असि न उठायेंगे।

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    परिजन’ से कवि का आशय किसके लिये इंगित होता है?
    Solutions
    परिजन का अर्थ होता है सम्बन्धीा। पाँडव अपने परिजन अर्थात् कौरवों से अपना राज्य वापस मांग रहे हैं।
  • Question 6/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    Direction:  दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    असली शत्रु तो घृणा और क्रोध हैं जिनसे हमें लड़ना है, इन्हें हराना है, इन पर विजय पानी है। यह हैं हमारे असली, पक्के शत्रु बाकी तो बस नकली ही समझो। फर्जी ही मानो उनको। ये तो हमारे जीवन में जीवन के हर मोड़ पर आते-जाते रहेंगे। हर कहीं टकरा जाएंगे। यह भी सच है, स्वभाविक है कि हम सब अच्छे मित्रों की तलाश में रहते हैं, पर यह भी सच है कि प्राय: मित्र तो मिलते नहीं, हाँ शत्रु ज़रूर पहँचते हैं। मैं अक्सर मज़ाक में कहता है कि यदि आप स्वार्थी बनना चाहते हों तो आपको अपने अलावा दूसरों का ध्यान रखना शुरू करना पड़ेगा। परोपकारी बने बिना आपका स्वार्थ पूरा होने से रहा। अपने घर पर ध्यान देना है तो दूसरों पर ध्यान देने लगो। अपनी चिंता करनी है तो दूसरों की चिंता करने लगो। उनकी सेवा करो। उनकी मदद में खड़े रहो। मित्र बनाते चलो। तब यदि आपको कभी कोई ज़रूरत होगी, कोई संकट आप पर ही गया तो समझिए आपके चारों ओर मित्र खड़े होंगे। हर तरह की दिक्कत को हल कर देने के लिए। लेकिन यदि आपने दूसरों का ध्यान नहीं रखा तो आप नुकसान में ही होंगे। निस्वार्थ प्यार ही सच्चे मित्र जुटाता है।

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    घृणा और क्रोध के अतिरिक्त बाकी चीज़ों को नकली शत्रु कहा गया है, क्योंकि घृणा और क्रोध-

    Solutions

    घृणा और क्रोध के अतिरिक्त बाकी चीज़ों को नकली शत्रु कहा गया है, क्योंकि घृणा और क्रोध नकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

  • Question 7/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    Direction:  दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    असली शत्रु तो घृणा और क्रोध हैं जिनसे हमें लड़ना है, इन्हें हराना है, इन पर विजय पानी है। यह हैं हमारे असली, पक्के शत्रु बाकी तो बस नकली ही समझो। फर्जी ही मानो उनको। ये तो हमारे जीवन में जीवन के हर मोड़ पर आते-जाते रहेंगे। हर कहीं टकरा जाएंगे। यह भी सच है, स्वभाविक है कि हम सब अच्छे मित्रों की तलाश में रहते हैं, पर यह भी सच है कि प्राय: मित्र तो मिलते नहीं, हाँ शत्रु ज़रूर पहँचते हैं। मैं अक्सर मज़ाक में कहता है कि यदि आप स्वार्थी बनना चाहते हों तो आपको अपने अलावा दूसरों का ध्यान रखना शुरू करना पड़ेगा। परोपकारी बने बिना आपका स्वार्थ पूरा होने से रहा। अपने घर पर ध्यान देना है तो दूसरों पर ध्यान देने लगो। अपनी चिंता करनी है तो दूसरों की चिंता करने लगो। उनकी सेवा करो। उनकी मदद में खड़े रहो। मित्र बनाते चलो। तब यदि आपको कभी कोई ज़रूरत होगी, कोई संकट आप पर ही गया तो समझिए आपके चारों ओर मित्र खड़े होंगे। हर तरह की दिक्कत को हल कर देने के लिए। लेकिन यदि आपने दूसरों का ध्यान नहीं रखा तो आप नुकसान में ही होंगे। निस्वार्थ प्यार ही सच्चे मित्र जुटाता है।

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    ______ बिना व्यक्ति का स्वार्थ पूरा नहीं होता।
    Solutions

    दूसरों पर उपकार किए बिना व्यक्ति का स्वार्थ पूरा नहीं होता।

    गद्यांश से स्पष्ट है कि यदि आप स्वार्थी बनना चाहते हों तो आपको अपने अलावा दूसरों का ध्यान रखना शुरू करना पड़ेगा। परोपकारी बने बिना आपका स्वार्थ पूरा होने से रहा।

  • Question 8/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    Direction:  दिए गए गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए तथा पूछे गए प्रश्नों के उत्तर के लिए सबसे उपयुक्त विकल्प का चयन कीजिए।

    असली शत्रु तो घृणा और क्रोध हैं जिनसे हमें लड़ना है, इन्हें हराना है, इन पर विजय पानी है। यह हैं हमारे असली, पक्के शत्रु बाकी तो बस नकली ही समझो। फर्जी ही मानो उनको। ये तो हमारे जीवन में जीवन के हर मोड़ पर आते-जाते रहेंगे। हर कहीं टकरा जाएंगे। यह भी सच है, स्वभाविक है कि हम सब अच्छे मित्रों की तलाश में रहते हैं, पर यह भी सच है कि प्राय: मित्र तो मिलते नहीं, हाँ शत्रु ज़रूर पहँचते हैं। मैं अक्सर मज़ाक में कहता है कि यदि आप स्वार्थी बनना चाहते हों तो आपको अपने अलावा दूसरों का ध्यान रखना शुरू करना पड़ेगा। परोपकारी बने बिना आपका स्वार्थ पूरा होने से रहा। अपने घर पर ध्यान देना है तो दूसरों पर ध्यान देने लगो। अपनी चिंता करनी है तो दूसरों की चिंता करने लगो। उनकी सेवा करो। उनकी मदद में खड़े रहो। मित्र बनाते चलो। तब यदि आपको कभी कोई ज़रूरत होगी, कोई संकट आप पर ही गया तो समझिए आपके चारों ओर मित्र खड़े होंगे। हर तरह की दिक्कत को हल कर देने के लिए। लेकिन यदि आपने दूसरों का ध्यान नहीं रखा तो आप नुकसान में ही होंगे। निस्वार्थ प्यार ही सच्चे मित्र जुटाता है।

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    गद्यांश के अनुसार कौन-सा कथन सही नहीं है -
    Solutions

    गद्यांश के अनुसार केवल अपना ध्यान रखना चाहिए कथन सही नहीं है क्योंकि यदि आप स्वार्थी बनना चाहते हों तो आपको अपने अलावा दूसरों का ध्यान रखना शुरू करना पड़ेगा। परोपकारी बने बिना आपका स्वार्थ पूरा होने से रहा। अपने घर पर ध्यान देना है तो दूसरों पर ध्यान देने लगो। अपनी चिंता करनी है तो दूसरों की चिंता करने लगो। उनकी सेवा करो।

  • Question 9/15
    1 / -0.25

    “गा कोकिल बरसा पावक कण” यह पंक्ति किनकी है?
    Solutions

    गा कोकिल बरसा पावक कण पंक्ति सुमित्रानंदन पन्त जी की हैं पंत जी हिंदी में छायावाद युग एक प्रमुख कवि थे।

    सुमित्रानंदन पण जी मुख कृतियां हैं : उच्छ्वास, पल्लव, वीणा, ग्रन्थि, गुंजन, ग्राम्या, युगांत, युगांतर, स्वर्णकिरण

  • Question 10/15
    1 / -0.25

    जायसी किस शासक के काल में थे?
    Solutions

    शेरशाह के शासन कल में जायसी ने आश्रय प्राप्त किया था शेरशाह के काल में ही जायसी ने ‘पद्मावत’ की

    रचना की थी पद्मावत हिन्दी साहित्य के अन्तर्गत सूफी परम्परा का प्रसिद्ध महाकाव्य है

  • Question 11/15
    1 / -0.25

    गुलाब का फूल सुंदर होते हैं " वाक्य में अशुद्धि है -

    Solutions

    वाक्य में करका संबंधी अशुद्धि है -

    गुलाब का फूल सुंदर होते हैं - गुलाब के फूल सुंदर होते हैं

    कारक संबंधी अशुद्धियाँ-कारक चिह्नों का सही प्रयोग न करने से वाक्य में कारक संबंधी प्रायः अशुद्धियाँ आ जाती हैं, जिससे वाक्य अटपटा-सा लगने लगता है।

  • Question 12/15
    1 / -0.25

    बसै बुराई जासु तन ,ताही को सम्मान

    भलो भलो कहि छोड़िए ,खोटे ग्रह जप दान।।

    उपर्युक्त पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?

    Solutions

    यहां पूर्वार्द्ध में उपमेय वाक्य और उत्तरार्द्ध में उपमान वाक्य है। इनमें 'सम्मान होना' और 'जपदान करना' ये दो भिन्न -भिन्न धर्म कहे गए हैं इन दोनों में बिम्ब -प्रतिबिम्ब भाव है अत: दृष्टान्त अलंकार है।
    दृष्टान्त अलंकार - जहां उपमेय , उपमान और साधारण धर्म का बिम्ब -प्रतिबिम्ब भाव होता है।

  • Question 13/15
    1 / -0.25

    अधरों में राग अमन्द पिए, अलकों में मलयज बन्द किए, तू अब तक सोई है आली। आँखों में भरे विहाग री।’ पंक्ति में कौन-सा रस है?
    Solutions
    ‘अधरों में राग अमन्द पिए, अलकों में मलयज बन्द किए, तू अब तक सोई है आली। आँखों में भरे विहाग री।’ पंक्ति में श्रृंगार रस है। श्रृंगार रस का स्थायी भाव रति होता है।
  • Question 14/15
    1 / -0.25

    काफी समय बाद जब सलमा मीनू से मिली, तो उसने सलमा से कहा, अब तो तुम कभी-कभी दिखाई देती हो। उपरोक्त वाक्य के रेखांकित पद-बन्ध के लिए कौन-सा मुहावरा उपयुक्त है?
    Solutions
    ईद का चाँद होना मुहावरे का अर्थ है - (बहुत दिनों बाद दिखाई देना) मुहावरे का प्रयोग - तुम तो दिखाई ही नहीं देते, लगता है कि ईद के चाँद हो गए हो।
  • Question 15/15
    1 / -0.25

    Directions For Questions

    निर्देश: नीचे कुछ वाक्यांश या शब्द दिए गये हैं और उसके बाद चार शब्द दिए गये हैं जो एक ही शब्द में इस वाक्यांश या शब्द-समूह का अर्थ प्रकट करता है। आपको यह पता लगाना है कि वह शब्द कौन सा है जो वाक्यांश या शब्द समूह का सही अर्थ प्रकट करता है। उस विकल्प का क्रमांक ही आपका उत्तर है। यदि कोई शब्द अर्थ नहीं प्रकट करता है तो उत्तर (5) अर्थात् इनमें से कोई उत्तर नहीं है l

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    जिसका जन्म कन्या के गर्भ से हुआ हो
    Solutions
    "जिसका जन्म कन्या के गर्भ से हुआ हो" वाक्यांश के लिए एक शब्द "कानीन" उचित है।
    अन्य विकल्प -
    कन्यापुत्र का अर्थ - कन्या का पुत्र
    अवैधपूर्ण का अर्थ - जिसमें कोई वैधता न हो
    कुमारीपुत्र का अर्थ - कुमारी का बेटा
    कानीन का अर्थ - जिसका जन्म कन्या के गर्भ से हुआ हो’
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