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1. श्रव्य भाषा विधि
2. व्याकरण अनुवाद
3. समग्र भौतिक प्रतिक्रिया
4. दक्षता आधारित उपागम
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भाषा शिक्षण की पद्धति जो इस धारणा पर बल देती है कि मौखिक कौशलों के अत्यधिक अभ्यास के द्वारा भाषा के धाराप्रवाह प्रयोग को विकसित किया जा सकता है। इसे श्रव्य भाषा विधि कहते हैं।
1. उपलब्धि परीक्षण
2. निपुणता परीक्षण
3. निदानात्मक परीक्षण
4. साप्ताहिक परीक्षण
अधिगम में आने वाली मुश्किलों को पहचानने के लिए निदानात्मक परीक्षण करते हैं ।
बच्चों की सीखने संबंधी कठिनाइयों का ज्ञान प्राप्त करने की क्रिया को शैक्षणिक निदान कहते हैं। यह वह प्रक्रिया है, जिसके द्वारा शिक्षा क्षेत्र में कमजोर बालकों की कठिनाइयों के सुधार हेतु ज्ञान प्राप्त किया जाता है। निदानात्मक परीक्षण द्वारा छात्र एवं अधयापक दोनों ही दोषों और समस्याओं से परिचित हो जाते हैं तथा उन दोषों को दूर करने में सक्षम हो सकते हैं।
1. निवेश समृद्ध परिवेश
2. भाषा संयोजन
3. भाषा अर्जन
4. भाषा अवबोधन
एक अध्यापक ने कक्षा में दीवारों पर चार्ट और ड्राइंग लगाई, शिक्षार्थियों के काम को बुलेटिन बोर्ड पर प्रदर्शित किया और कक्षा की बहुत सी वस्तुओं के नाम अंग्रेज़ी तथा शिक्षार्थियों के घर की भाषा में लिखे। अध्यापक ने निवेश समृद्ध परिवेश का उदाहरण प्रस्तुत किया है।
1. लेखन का प्रक्रिया उपागम
2. लेखन का उत्पाद उपागम
3. किसी लिखित सामग्री का श्रुतलेख
4. टिप्पणी लिखना तथा सारांश करना
• विकास के विभिन्न चरणों का अनुसरण करते हुए शिक्षार्थियों में स्वतंत्र लेखन कौशल का विकास करने में ‘लेखन का प्रक्रिया उपागम’ मदद करता है।
• उदाहरण के लिए, अध्यापिका द्वारा अपने विद्यार्थियों को उन्हें क्या पसन्द है तथा क्या नापसन्द है' पर समूह में चर्चा करने तथा बाद में उन्हें कुछ वाक्यों में लिखने के लिए कहती है। विद्यार्थियों ने अपने विचारों को लिखा, एक रूपरेखा बनाई तथा एक अनुच्छेद लिखा। लिखने के इस उपागम को लिखने का प्रक्रिया उपागम कहते है ।
• लिखना एक प्रकार की संरचनात्मक प्रक्रिया है जिसमे शिक्षार्थी खुद को जान पाते है।
1. आधारभूत अंतर्वैयक्तिक संप्रेषणात्मक कौशल (BICS)
2. संज्ञानात्मक रूप से उच्च स्तरीय भाषिक निपुणता (CALP)
3. विमर्श दक्षता
4. समूह चर्चा
खेल के मैदान, फोन पर या दूसरे व्यक्तियों के साथ सामाजिक रूप से अंतः क्रिया में प्रयोग की जाने वाली भाषा आधारभूत अंतर्वैयक्तिक संप्रेषणात्मक कौशल (BICS) का भाग है।
* आधारभूत अंत: व्यक्तिक सम्प्रेषणात्मक कौशल (BICS)- बेसिक इंटरपर्सनल कम्युनिकेशन स्किल्स (BICS) दैनिक, सामाजिक आमने-सामने बातचीत में आवश्यक भाषाई कौशल को संदर्भित करता है।
* उदाहरण के लिए, खेल के मैदान में, फोन पर या अन्य लोगों के साथ सामाजिक रूपसे बातचीत करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली भाषा BICS का हिस्सा है। इन सामाजिक अंतःक्रियाओं में प्रयुक्त भाषा संदर्भसन्निहित है। यह सार्थक, संज्ञानात्मक रूप से और गैर-विशिष्ट है।
* BICS को विकसित करने में शिक्षार्थी को छह महीने से लेकर दो साल तक का समय लगता है।
1. पूरी विद्यालयी शिक्षा के दौरान संस्कृत/शास्त्रीय भाषा निर्देश के माध्यम के रूप में।
2. पूरी विद्यालयी शिक्षा के दौरान निर्देश के माध्यम के तौर पर मातृभाषा।
3. पूरी विद्यालयी शिक्षा के दौरान निर्देश के माध्यम के तौर पर हिन्दी भाषा।
4. पूरी विद्यालयी शिक्षा के दौरान निर्देश के माध्यम के तौर पर अंग्रेज़ी भाषा।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (2020) पूरी विद्यालयी शिक्षा के दौरान निर्देश के माध्यम के तौर पर मातृभाषा अध्ययन का समर्थन करती है।
* नई शिक्षा नीति 2020 भारत की शिक्षा नीति है जिसे भारत सरकार द्वारा 29 जुलाई 2020 को घोषित किया गया। सन 1986 में जारी हुई नई शिक्षा नीति के बाद भारत की शिक्षा नीति में यह पहला नया परिवर्तन है।
* पाँचवीं कक्षा तक की शिक्षा में मातृभाषा/स्थानीय या क्षेत्रीय भाषा को शिक्षा के माध्यम के रूप में अपनाने पर बल दिया गया है। साथ ही मातृभाषा को कक्षा-8 और आगे की शिक्षा के लिये प्राथमिकता देने का सुझाव दिया गया है।
एक बहुभाषिक कक्षा में शिक्षक को संसाधन सामग्री का निर्माण, चयन करते समय 'भाषिक विविधता' पर सबसे अधिक ध्यान देना चाहिए। शिक्षक को सामग्रियों का चयन करते समय क्षेत्र विशेष की भाषा एवं समायोजित भाषा के उचित समायोजन पर ध्यान देना चाहिए जिससे बहुभाषी कक्षा में विद्यार्थियों की भाषा का समुचित विकास हो सके।
बहुभाषिकता से निश्चित 'व्यवहारगत' लाभ होते हैं। दो भाषाओं के ज्ञान की स्थिति द्विभाषिक है। बहुत सी भाषाओं को जानने वाले की बहुभाषिक कहते हैं। बहुभाषिकता से शिक्षार्थी में अधिक संवाद कौशल वृद्धि, उच्च भाषाई बोध, अपने परिवेश के अनुरूप ढलना, कुशल बहुकार्यत्मकता एवं स्मृति सुधार आदि की वृद्धि होती है।
सोद्देश्यपूर्ण लेखन का उदारण नहीं है- सुलेख का कार्य। लेखन का उद्देश्य भावों, विचारांचा अनुभवों को लिखित रूप में सुरक्षित रखना है। विद्यार्थियों को वर्तमान समय में बालकों के लिये सन्तुलित भोजन पर लेख, स्थानीय वस्तुआ का ज्ञान, वस्तु |चित्रण पर लेख, नौकरी के लिये आवेदन पत्र, मंचन में संवाद साइकिल चोरी हो जाने सूचना लिखना आदि के माध्यम में सोद्देश्यपूर्ण लेखन को प्राप्त कर सकते हैं।
हिंदी भाषा आकलन की दृष्टि से बेहतर प्रश्न है। जैसेकिसी ऐसी घटना का वर्णन कीजिए, जब रक्त की कमी हो गई हो।" उपयुक्त है। भाषा आकलन एक संवादात्मक तथा रचनात्मक प्रक्रिया माना जाता है। शिक्षक विद्यार्थी का उचित भाषा अधिगम की जांच करता है। आकलन का उद्देश्य निदानात्मक होता है। हिंदी भाषा का आकलन करने के संदर्भ में वे प्रश्न अपेक्षाकृत होते हैं। जो कल्पना और सृजनशीलता को बढ़ावा देता है। ऐसे प्रश्न मुक्त प्रश्न में आते हैं।
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