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दृष्टांत छंद का प्रकार नहीं है। चौपाई, दोहा, सोरठा, उल्लाला, कुडंलिया, छप्पय, अहीर, रोला, आल्हा, हरिगीतिका, बरवै इत्यादि छंद के प्रकार हैं।
जिन छन्दों की रचना मात्राओं की गणना के आधार पर होती हैं, उन्हें मात्रिक छन्द कहते है। जैसे-दोहा, चौपाई, रोला आदि। मात्रिक छन्द तीन प्रकार के होते हैं- 1. सममात्रिक छन्द, 2. अर्धमात्रिक छन्द, 3. विषम मात्रिक छन्द।
प्राचीन काल के ग्रंथों में संस्कृत में कई प्रकार के छन्द मिलते हैं जो वैदिक काल के जितने प्राचीन हैं। वेद के सूक्त भी छन्दबद्ध हैं। पिंगल द्वारा रचित छन्दशास्त्र इस विषय का मूल ग्रन्थ है। छन्द पर चर्चा सर्वप्रथम ऋग्वेद में हुई है।
परशु सुधारि धरेरू कर (घोरा)
अब जानि देउ दोष मोहि लोगू
कटुवादी बालक वध जोर
उपर्युक्त पंक्ति में कौन सा रस है?
सुनत लखन के वचन कठोरा&llt;/p>
आश्रय - परशुराम
विषय - लक्ष्मण
उद्दीपन - लक्ष्मण का मुस्काना
अनुभाव - क्रोध करना, वाचिक
संचारी - उग्रता
स्थायीभाव - क्रोध
अप रहचते लगि लग्यो, मांगन सबु जग आनि।।
कन देबो सोयो ससुर, बहू, थुरहथी जानि
आश्रय - पाठक/दर्शक
विषय - ससुर, बहु
उद्दीपन - मांगने वालों की कतार लगना
अनुभाव - हंसना
स्थायीभाव - हास्य
संचारीभाव - हर्ष
Directions For Questions
उपर्युक्त पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?
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जब समानता होने के कारण मनु, जनु, जनहु, जानो, मानहु, मानो, निश्चय, ईव, ज्यों आदि शब्दों के द्वारा उपमेय में उपमान के होने कि कल्पना की जाए या संभावना हो तो वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है।
काव्यांश में ‘ज्यों’ शब्द का भी प्रयोग हुआ है। अतः यहां उत्प्रेक्षा अलंकार है।
उपसर्ग दो शब्दों से मिलकर बना होता है उपसर्ग - (उप + सर्ग) उप का अर्थ होता है समीप और सर्ग का अर्थ होता है सृष्टि करना। उपसर्ग शब्द के पहले आते है। जैसे- ‘अन’ उपसर्ग ‘बन’ शब्द के पहले रख देने से एक शब्द ‘अनबन’ बनता है‘अलंकार’- अलम् + कार में अलम् उपसर्ग का प्रयोग हुआ है। अलंकार का अर्थ - आभूषण या शोभा
भाषा - शब्द
a.अरबी - 1) बिगुल
b.फ्रांसीसी - 2) फीता
c.पुर्तगाली - 3) बर्फ
d.फारसी - 4) खासी
अरबी - बर्फ
फ्रांसीसी - बिगुल
पुर्तगाली - फीता
फारसी - खासी
‘वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।’ में लाटानुप्रास अलंकार है।
अनुप्रास अलंकार - अनुप्रास शब्द 'अनु' तथा 'प्रास' शब्दों के योग से बना है। 'अनु' का अर्थ है :- बार-बार तथा 'प्रास' का अर्थ है- वर्ण। जहाँ वर्णों की आवृत्ति बार-बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
लाटानुप्रासअलंकार - जब एक शब्द आवृत्ति उसी अर्थ में हो, पर तात्पर्य या अन्वय में भेद हो, तो वहाँ 'लाटानुप्रास' होता है।
लाटानुप्रासअलंकार , यमक का उलटा होता है।
वही मनुष्य है कि जो मनुष्य के लिए मरे।
इसमें 'मनुष्य' शब्द की आवृत्ति दो बार हुई है। दोनों का अर्थ 'आदमी' है। पर तात्पर्य या अन्वय में भेद है। पहला मनुष्य कर्ता है और दूसरा सम्प्रदान।
अलंकार - अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है अलम् अर्थात् भूषण। जो भूषित करे वह अलंकार है। अलंकार, कविता-कामिनी के सौन्दर्य को बढ़ाने वाले तत्व होते हैं।
मुख चन्द्रमा के समान सुंदर है वाक्य में उपमा अलंकार है
उपमा अलंकार - किसी प्रस्तुत वस्तु की उसके किसी विशेष गुण, क्रिया, स्वभाव आदि की समानता के आधार पर अन्य अप्रस्तुत से समानता स्थापित की जाए तो उपमा अलंकार होगा।
i. उपमेय- जिसकी तुलना की जाय जाए। जैसे- मुख चन्द्रमा के समान सुंदर है। इस उदाहरण में मुख उपमेय है।
ii. उपमान- जिससे तुलना की जाय जाए। उपर्युक्त उदाहरण में चन्द्रमा उपमान है।
iii. साधारण धर्म- उपमेय और उपमान में विद्यमान समान गुण या प्रकृति को साधारण धर्म कहते है। ऊपर दिए गए उदाहरण में 'सुंदर ' साधारण धर्म है
iv. वाचक -समानता बताने वाले शब्द को वाचक शब्द कहते हैं। ऊपर दिए गए उदाहरण में वाचक शब्द 'समान' है।
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