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Hindi Test 58
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Hindi Test 58
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  • Question 1/10
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    Directions For Questions

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    वह आता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

    पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,

    चल रहा लकुटिया टेक,

    मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को

    मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

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    ‘पेट - पीठ दोनों मिलकर हैं एक’ इसका कारण क्या हो सकता है?

    Solutions

    उपरोक्त पद्यांश के अनुसार, कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी दीन-हीन अवस्था में एक भिखारी की दशा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि‘पेट - पीठ दोनों मिलकर हैं एक’अर्थात् भिखारी इतने दिनों से भूखा है कि उसकी पीठ और पेट आपस में मिल गए हैं। इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।

  • Question 2/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    वह आता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

    पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,

    चल रहा लकुटिया टेक,

    मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को

    मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

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    ‘कलेजे के दो टूक करना’ का आशय है-
    Solutions

    ‘कलेजेके दो टूक करना’पंक्ति से कवि का आशय यह है कि भारत के भिखारी की दीन-हीन दशा देखकर उसके कलजे के दो टूक हो गए अर्थात् उनके मन को बहुत कष्ट पहुंचा है।

  • Question 3/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    वह आता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

    पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,

    चल रहा लकुटिया टेक,

    मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को

    मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

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    भिखारी अपनी झोली क्यों फैलाता है?
    Solutions

    उपरोक्त पद्यांश के अनुसार भिखारी अपनी झोली भीख मांगने के लिए फैलाता है ताकि उसे अन्न मिल सके और वे अपनी भूख मिटा सके।

  • Question 4/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    वह आता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

    पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,

    चल रहा लकुटिया टेक,

    मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को

    मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

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    काव्यांश से हमारे मन में उठने वाला मुख्य भाव है-
    Solutions

    काव्यांश से हमारे मन में उठने वाला मुख्य भाव करूणा है। करूणा उस भिक्षुक के प्रति जिसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया, जो लाठी के सहारे चलता है, जिसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया, जो अपनी फटी पुरानी झोली फैलाकर भीख मांग रहा है।

  • Question 5/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए:

    वह आता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

    पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,

    चल रहा लकुटिया टेक,

    मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को

    मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-

    दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl

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    ‘वह आता’ में ‘वह’ सर्वनाम किसका घोतक हो सकता है?
    Solutions

    वह आता’ में ‘वह’ सर्वनाम भिक्षुक का घोतक हो सकता है l संज्ञा के स्थान पर जिन शब्दों को प्रयोग किया जाता है, उन्हें ‘सर्वनाम’ कहते हैं l हिंदी में सर्वनामों की संख्या 11 है l मैं, टू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या l ऐसे ही ‘वह आता है’ में वह भिक्षुक के लिए कहा गया है l

  • Question 6/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं

    सच है महज संघर्ष ही।

    संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।

    जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

    जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।

    जो हार देख झुका नहीं।

    जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

    ऐसा करो जिससे प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।

    जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।

    जो भी परिस्थितियाँ मिलें।

    काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।

    हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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    कवि के अनुसार जीत किसकी होती है?
    Solutions

    कवि कहता है जो प्रेम को ही अपना पथ मान लेता है जीत उसी की होती है

    कविता की पक्तियों से - जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

  • Question 7/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं

    सच है महज संघर्ष ही।

    संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।

    जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

    जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।

    जो हार देख झुका नहीं।

    जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

    ऐसा करो जिससे प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।

    जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।

    जो भी परिस्थितियाँ मिलें।

    काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।

    हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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    फूलों के साथ चलने का तात्पर्य है।
    Solutions

    कविता में कवि कहता है कि फूलों के साथ चलने का तात्पर्य सुविधा भोगी जीवन के साथ जीने से है

  • Question 8/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं

    सच है महज संघर्ष ही।

    संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।

    जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

    जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।

    जो हार देख झुका नहीं।

    जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

    ऐसा करो जिससे प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।

    जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।

    जो भी परिस्थितियाँ मिलें।

    काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।

    हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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    काँटे और कलियाँ किसके प्रतीक हैं?
    Solutions

    कविता में काँटे और कलियाँ, दुःख और सुख के प्रतीक है

  • Question 9/10
    1 / -0

    Directions For Questions

    निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं

    सच है महज संघर्ष ही।

    संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।

    जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

    जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।

    जो हार देख झुका नहीं।

    जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

    ऐसा करो जिससे प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।

    जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।

    जो भी परिस्थितियाँ मिलें।

    काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।

    हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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    नत वक्ती किस तरह मृत हो जाता है?
    Solutions

    कविता से जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

  • Question 10/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: निम्नलिखित काव्यांश को पढ़कर नीचे लिखे प्रश्नों के सही विकल्प चुनकर उत्तर दीजिए।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं

    सच है महज संघर्ष ही।

    संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।

    जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।

    जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।

    जो हार देख झुका नहीं।

    जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

    ऐसा करो जिससे प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।

    जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।

    जो भी परिस्थितियाँ मिलें।

    काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।

    हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।

    सच हम नहीं सच तुम नहीं।

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    जीवन का क्या सन्देश बताया गया है?
    Solutions

    कवि ने जीवन का सन्देश बताया है कि इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। इंसान के हार मानने पर वह जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता अत: कवि कहता है कि इंसान को जीवन में कभी हा नहीं माननी चाहिए और संघर्ष करते रहना चाहिए

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