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Directions For Questions
वह आता-
दो टूक कलेजे के करता पछताता पथ पर आताl
पेट-पीठ दोनों मिलकर हैं एक,
चल रहा लकुटिया टेक,
मुट्ठी- भर दाने को - भूख मिटाने को
मुँह फटी पुरानी झोली को फैलाता-
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‘पेट - पीठ दोनों मिलकर हैं एक’ इसका कारण क्या हो सकता है?
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उपरोक्त पद्यांश के अनुसार, कवि सूर्यकांत त्रिपाठी निराला जी दीन-हीन अवस्था में एक भिखारी की दशा का वर्णन करते हुए कहते हैं कि‘पेट - पीठ दोनों मिलकर हैं एक’अर्थात् भिखारी इतने दिनों से भूखा है कि उसकी पीठ और पेट आपस में मिल गए हैं। इसलिए विकल्प C सही उत्तर है।
‘कलेजेके दो टूक करना’पंक्ति से कवि का आशय यह है कि भारत के भिखारी की दीन-हीन दशा देखकर उसके कलजे के दो टूक हो गए अर्थात् उनके मन को बहुत कष्ट पहुंचा है।
उपरोक्त पद्यांश के अनुसार भिखारी अपनी झोली भीख मांगने के लिए फैलाता है ताकि उसे अन्न मिल सके और वे अपनी भूख मिटा सके।
काव्यांश से हमारे मन में उठने वाला मुख्य भाव करूणा है। करूणा उस भिक्षुक के प्रति जिसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया, जो लाठी के सहारे चलता है, जिसने कई दिनों से कुछ नहीं खाया, जो अपनी फटी पुरानी झोली फैलाकर भीख मांग रहा है।
वह आता’ में ‘वह’ सर्वनाम भिक्षुक का घोतक हो सकता है l संज्ञा के स्थान पर जिन शब्दों को प्रयोग किया जाता है, उन्हें ‘सर्वनाम’ कहते हैं l हिंदी में सर्वनामों की संख्या 11 है l मैं, टू, आप, यह, वह, जो, सो, कोई, कुछ, कौन, क्या l ऐसे ही ‘वह आता है’ में वह भिक्षुक के लिए कहा गया है l
सच हम नहीं सच तुम नहीं
सच है महज संघर्ष ही।
संघर्ष से हटकर जिए तो क्या जिए हम या कि तुम।
जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।
जो लक्ष्य भूल रुका नहीं।
जो हार देख झुका नहीं।
जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।
सच हम नहीं सच तुम नहीं।
ऐसा करो जिससे न प्रार्वों में कहीं जड़ता रहे।
जो है जहाँ चुपचाप अपने-आप से लड़ता रहे।
जो भी परिस्थितियाँ मिलें।
काँटे चुभें, कलियाँ खिलें।
हारे नहीं इंसान, है सन्देश जीवन का यही।
कवि कहता है जो प्रेम को ही अपना पथ मान लेता है जीत उसी की होती है
कविता की पक्तियों से - जिसने प्रणय पाथेय माना जीत उसकी ही रही।
कविता में कवि कहता है कि ‘फूलों के साथ’ चलने का तात्पर्य सुविधा भोगी जीवन के साथ जीने से है
कविता में काँटे और कलियाँ, दुःख और सुख के प्रतीक है
कविता से जो नत हुआ वह मृत हुआ ज्यों वृंत से झरकर कुसुम।
कवि ने जीवन का सन्देश बताया है कि इंसान को हार नहीं माननी चाहिए। इंसान के हार मानने पर वह जीवन में सफलता प्राप्त नहीं कर पाता अत: कवि कहता है कि इंसान को जीवन में कभी हार नहीं माननी चाहिए और संघर्ष करते रहना चाहिए
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