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Hindi Test 62
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Hindi Test 62
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  • Question 1/8
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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    ‘धन उपार्जन’ में संधि करने पर शब्द बनेगा

    Solutions

     ‘धन उपार्जन’ में संधि करने पर शब्द धनोपार्जन बनेगा l दो वर्णों या ध्वनियों के संयोग से होने वाले विकार (परिवर्तन) को संधि कहते हैं; जैसे- विदधा + आलय = विदधालय, धन + उपार्जन =धनोपार्जन l

  • Question 2/8
    1 / -0

    Directions For Questions

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    ‘आज पूरा जीवन - दर्शन बदल गया हैl’

    उक्त कथन का आशय है_________

    Solutions

    उपरोक्त गद्यांश के अनुसार, आज पूरा जीवन - दर्शन बदल गया हैl ’कथन का आशय है कि आज जीवन के प्रति मानव के दृष्टिकोण में बदलाव आ गया हैl हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्श नही बदल गया हैl

  • Question 3/8
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    Directions For Questions

    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    प्राचीन काल में जीवन का वास्तविक लक्ष्य क्या माना गया था?
    Solutions

    प्राचीन काल में जीवन का वास्तविक लक्ष्य नैतिक और आध्यात्मिक विकास माना गया था।

  • Question 4/8
    1 / -0

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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    ‘जघन्य’ शब्द का अर्थ नहीं है -
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    जघन्य का अर्थ है अति निंदनीय और बुरा, गर्हित (जैसे—जघन्य अपराध)।
    दिए गए विकल्पों में जाँघ से संबंधित शब्द का अर्थ जघन्य नहीं है। अन्य शब्दों के अर्थ जघन्य है।

  • Question 5/8
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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    हमारे मानवीय संबंध पीछे छूटने का कारण है-
    Solutions

    हमारे मानवीय संबंध पीछे छूटने का कारण है धन कमाने की अंधी दौड़ l हर जरूरत को पूरा करने में धन अहम भूमिका अदा करता है। महापुरुष भी कहते हैं कि व्यक्ति को धन का लोभ नहीं होना चाहिए। लोभ तभी होता है जब आपकी आकांक्षा बढ़ती है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमेशा धन को अलग रखना चाहिए। वर्तमान समय में देखा गया है कि लोग धन को अधिक महत्व दे रहे हैं पारिवारिक रिश्तों को दरकिनार कर रहे है l

  • Question 6/8
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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    मानसिक तनाव की व्याधियों का कारण लेखक ने क्या माना है?
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    मानसिक तनाव की व्याधियों का कारण किसी भी प्रकार धन कमाने की इच्छा बताया गया है l आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव एक आम समस्या बन चुका है। आज के समय में ज्यादा से पैसा या धन कमाने की इच्छा सामान्यत: सभी की है। इसी वजह से लोग कड़ी मेहनत करते हैं। इसलिए धन कमाने की इच्छा रखने वालों को मानसिक तनाव झेलना पड़ता है l

  • Question 7/8
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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    उस शब्द युग्म को पहचानिए जो शेष से भिन्न हो:
    Solutions

    चोरी - डकैती शब्द युग्म है जो शेष से भिन्न है l हिंदी के अनेक शब्द ऐसे हैं, जिनका उच्चारण प्राय: समान होता है l किन्तु उनके अर्थ भिन्न होते हैं l इन्हें ‘शब्द युग्म’ कहते हैं l दूसरे शब्दों में- हिंदी में कुछ शब्द ऐसे हैं, जिनका प्रयोग गद्ध की अपेक्षा पद्ध में अधिक होता है l

  • Question 8/8
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    निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों  के सबसे उपयुक्त उत्तर वाले विकल्प को चुनिए :

    हमारे देश में एक ऐसा भी युग था जब नैतिक और आध्यात्मिक विकास ही जीवन का वास्तविक लक्ष्य माना जाता थाl अहिंसा की भावना सर्वोपरि थीl आज पूरा जीवन - दर्शन ही बदल गया हैl सर्वत्र पैसे की हाय-हाय तथा धन का उपार्जन ही मुख्य हो गया है, भले ही धन- उपार्जन के तरी के गलत ही क्यों न होंl इन सब का असर मनुष्य के प्रतिदिन के जीवन पर पड़ रहा हैl समाज का वातावरण दूषित हो गया हैl इन सब के कारण मानसिक और शारीरिक तनाव - खिंचाव और व्याधियाँ पैदा हो रही हैंl

    आज आदमी धन के पीछे अंधाधुंध दौड़ रहा हैl पाँच रुपये मिलने पर दस,दस मिलने पर सौ और सौ मिलने पर हज़ार की लालसा लिए वह इस अंधी दौड़ में शामिल हैl इस दौड़ का कोई अंत नहींl धन की इस दौड़ में सभी पारिवारिक और मानवीय संबंध पीछे छूट गएl व्यक्ति सत्य-असत्य, उचित-अनुचित, न्याय-अन्याय और अपने- पराए के भेद-भाव को भूल गयाl उसके पास अपनी पत्नी और संतान के लिए भी समय नहींl धन के लिए पुत्र का पिता के साथ, बेटी का माँ के साथ और पति का पत्नी के साथ झगड़ा हो रहा हैl भाई - भाई के खून का प्यासा हैl धन की लालसा व्यक्ति को जघन्य से जघन्य कार्य करने के लिए उकसा रही हैl इस लालसा का ही परिणाम है कि जगह - जगह हत्या, लूट, अपहरण और चोरी - डकैती की घटनाएँ बढ़ रही हैंl इस रोगी मनोवृत्ति को बदलने के लिए हमें हर स्तर पर प्रयत्न करने होंगेl

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    किस दौड़ को अंतहीन माना गया है?
    Solutions

    किसी भी प्रकार धन जोड़ने की दौड़ को अंतहीन माना गया है l क्योंकि वर्तमान समय में लोग धन को अधिक महत्व देने लगे हैं। धन के आगे पारिवारिक रिश्ते कमजोर पड़ गए हैं। लोग धन अधिक से अधिक खर्च कर रहे हैं। लोगों को धन का महत्व समझना चाहिए l इसलिए धन जोड़ने की दौड़ को अंतहीन माना गया है l

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