Please wait...
/
-
Verify mobile number to view the solution
अन्योक्ति अलंकार - अन्योक्ति का अर्थ है अन्य के प्रति कही गई उक्ति । इस अलंकार में अप्रस्तुत के माध्यम से प्रस्तुत का वर्णन किया जाता है ! जैसे -
नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास इहि काल । अली कली ही सौं बिध्यौं आगे कौन हवाल ।।
यहां भ्रमर और कली का प्रसंग अप्रस्तुत विधान के रूप में है जिसके माध्यम से राजा जयसिंह को सचेत किया गया है , अत: अन्योक्ति अलंकार है !
“ फबि फहरहिं अति उच्च निसाना।
जिन्ह मँह अटकहिं बिबुध बिमाना।। “
अलंकार - अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है आभूषण और कार का अर्थ है 'सुसज्जित करने वाला'। जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग में लाती हैं उसी प्रकार भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है, अर्थात जो शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं।
अतिश्योक्ति अलंकार - जब दो वस्तुओं में संबंध न होने पर भी संबंध दिखाया जाए
फबि = शोभा देना, निसाना = ध्वज, बिबुध = देवता।
यहाँ झंडे और विमानों में अटकने का संबंध न होने पर भी बताया गया है।
Directions For Questions
...view full instructions
Correct (-)
Wrong (-)
Skipped (-)