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रस, छंद और अलंकार Test 64
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रस, छंद और अलंकार Test 64
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  • Question 1/10
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    प्रस्तुत पंक्ति में किस अलंकार का प्रयोग हुआ है? 
    “नहि पराग नहि मधुर मधु
    नहि विकास एहि काल
    अली कली ही सौ बंधयौ
    आगे कौन हवाल ||”
    Solutions

    अन्योक्ति अलंकार - अन्योक्ति का अर्थ है अन्य के प्रति कही गई उक्ति । इस अलंकार में अप्रस्तुत के  माध्यम से प्रस्तुत का वर्णन किया जाता है ! जैसे -

                 नहिं पराग नहिं मधुर मधु नहिं विकास इहि काल ।
                 अली कली ही सौं बिध्यौं आगे कौन हवाल  ।।

    यहां भ्रमर और कली का प्रसंग अप्रस्तुत विधान के रूप में है जिसके माध्यम से राजा जयसिंह को सचेत किया गया है , अत: अन्योक्ति अलंकार है !

  • Question 2/10
    1 / -0

    निम्न में से सही मिलान कीजिए -

       रस         स्थायी भाव 
    a.वीर         1.उत्साह
    b.अदभुत     2.जुगुप्सा
    c.वीभत्स      3.विस्मय
    d.भयानक    4.भय
    Solutions
    रस - रस का शाब्दिक अर्थ है 'आनन्द'। काव्य को पढ़ने या सुनने से जिस आनन्द कीअनुभूति होती है, उसे 'रस' कहा जाता है।
    रस - स्थायी भाव
    शृंगार - रति
    हास्य - हास
    रौद्र - क्रोध
    करुण - शोक
    वीर - उत्साह
    अदभुत - विस्मय
    वीभत्स - जुगुप्सा (घृणा)
    भयानक - भय
    शान्त - निर्वेद
  • Question 3/10
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    वाक्य में अलंकार है।

    फबि फहरहिं अति उच्च निसाना।

    जिन्ह मँह अटकहिं बिबुध बिमाना।। “

    Solutions

    अलंकार - अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है आभूषण और कार का अर्थ है 'सुसज्जित करने वाला'। जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग में लाती हैं उसी प्रकार भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है, अर्थात जो शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं।

    अतिश्योक्ति अलंकार - जब दो वस्तुओं में संबंध न होने पर भी संबंध दिखाया जाए

    फबि = शोभा देना, निसाना = ध्वज, बिबुध = देवता।

    यहाँ झंडे और विमानों में अटकने का संबंध न होने पर भी बताया गया है।

  • Question 4/10
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    हास्य रस का स्थायी भाव है ।
    Solutions
    हास्य रस का स्थायी भाव “हास” है जहाँ विकृत वेश-भूषा देखकर हंसी उत्पन्न होती है। उसे हास्य रस कहते हैं।
    जैसे: 
    विन्ध्य के वासी उदासी तपो व्रत धारी महा बिनु नारि दुखारे
    गौतम तीय तरी तुलसी सो कथा सुनि भे मुनि वृन्द सुखारे
  • Question 5/10
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    प्रस्तुत पंक्ति में अलंकार है
    “मेघमय आसमान से उतर रही है संध्या सुंदरी धीरे धीरे “।
    Solutions
    अलंकार - अलंकार दो शब्दों से मिलकर बना होता है – अलम + कार। यहाँ पर अलम का अर्थ होता है  आभूषण और कार का अर्थ है 'सुसज्जित करने वाला'। जिस तरह से एक नारी अपनी सुन्दरता को बढ़ाने के लिए आभूषणों को प्रयोग में लाती हैं उसी प्रकार भाषा को सुन्दर बनाने के लिए अलंकारों का प्रयोग किया जाता है, अर्थात जो शब्द काव्य की शोभा को बढ़ाते हैं उसे अलंकार कहते हैं।
    मानवीकरण अलंकार - जहाँ जड़ वस्तुओं या प्रकृति पर मानवीय चेष्टाओं का आरोप किया जाता है, वहाँ मानवीकरण अलंकार होता है।
    उदाहरण-
    फूल हंसे कलियां मुसकाईं।
    यहाँ फूलों का हँसना, कलियों का मुस्कराना मानवीय चेष्टाएँ हैं। अत: मानवीकरण अलंकार है।
  • Question 6/10
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    ‘चौपाई’ छन्द के प्रत्येक चरण में कितनी मात्राएँ होती हैं?
    Solutions
    चौपाई मात्रिक सम छन्द का एक भेद है। प्राकृत तथा अपभ्रंश के 16 मात्रा के वर्णनात्मक छन्दों के आधार पर विकसित हिन्दी का सर्वप्रिय और अपना छन्द है। गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस में चौपाइ छन्द का बहुत अच्छा निर्वाह किया है। चौपाई में चार चरण होते हैं, प्रत्येक चरण में 16-16 मात्राएँ होती हैं तथा अन्त में गुरु होता है।
  • Question 7/10
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    श्रृंगार रस का स्थायी भाव है।
    Solutions
    श्रृंगार रस - श्रृंगार रस को रसराज कहा गया है। इसका स्थाई भाव रति होता है श्रृंगार रस में नायक और नायिका के मन में संस्कार रूप में स्थित रति या प्रेम जब रस कि अवस्था में पहुँच जाता है तो वह श्रृंगार रस कहलाता है इसके अंतर्गत सौन्दर्य, प्रकृति, सुन्दर वन, वसंत ऋतु आदि के बारे में वर्णन किया जाता है।
    श्रृंगार रस रस दो प्रकार के होते हैं 1- संयोग श्रृंगार रस 2-वियोग श्रृंगार रस
    संयोग श्रृंगार - जब नायक नायिका के परस्पर मिलन, स्पर्श, आलिंगन, वार्तालाप आदि का वर्णन होता है तब वहां पर संयोग श्रृंगार रस होता है।
    वियोग श्रृंगार रस - जहां पर नायक-नायिका का परस्पर प्रबल प्रेम हो लेकिन मिलन न हो अर्थात नायक-नायिका के वियोग का वर्णन हो वहां पर वियोग रस होता है।
  • Question 8/10
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    "दुःख ही जीवन की कथा रही क्या कहूँ आज जो नहीं कही।"
    उक्त पंक्ति में कौन सा रस है?
    Solutions
    दिए गए पद में करुण रस है। जब भी किसी साहित्यिक काव्य , गद्य आदि को पढ़ने के बाद मन में करुणा, दया का भाव उत्पन्न हो तो करुण रस होता है। इसका स्थायी भाव शोक होता है।
    दिए गए पद में किसी व्यक्ति के जीवन के दुःख के बारे में बात की गयी है इसीलिये इसमें करुण रस है।
  • Question 9/10
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    Directions For Questions

    निम्नलिखित पंक्तियों में कौन-सा अलंकार है?

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    सोहत ओढ़े पीत पट, श्याम सलोने गात।
    मनो नील मणि शैल पर, आतप परयो प्रभात ।।
    Solutions
    उत्प्रेक्षा:-जहाँ उपमेय में उपमान की सम्भावना की जाती हैं वहां उत्प्रेक्षा अलंकार होता है
    दी गई पंक्तियों में उत्प्रेक्षा अलंकार है। 
  • Question 10/10
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    Directions For Questions

    निर्देश: प्रस्तुत पंक्ति में कौन सा रस है ?

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    "जसोदा हरि पालने झ्लावें।
    हलरावें दुलरावें मलरावें, जोई-सोई कछु गावें"
    Solutions
    प्रस्तुत पंक्ति में वात्सल्य रस है | क्योंकि इसमें कृष्ण के प्रति यशोदा की ममता का वर्णन किया गया है ।

    वात्सल्य रस:-इसका स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।
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