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प्रस्तुत प्रश्न में सभी कथन सही है क्योंकि उपचारात्मक शिक्षण के द्वारा छात्रों की कठिनाइयों का निराकरण, छात्रों के विभिन्न कौशलों को उन्नत बनाना तथा इससे कमजोर छात्रों के स्तर को सुधारा जा सकता है।
1) यह भाव बोध का अन्यतम साधन है।
2) भाषा के माध्यम से ही संबोधकरूप में वक्ता अथवा लेखक अव्यक्त संदेश की अभिव्यक्ति करता है।
सही कूट का चयन करें-
भाषा संप्रेषण का महत्वपूर्ण माध्यम और भावबोध का अन्यतम साधन है। भाषा के माध्यम से मनुष्य केवल अपने विचारों को अभिव्यक्त कर सकता है, बल्कि उन्हें दूसरों तक संप्रेवषित भी कर सकता है। संप्रेषणव्यवहार के संदर्भ में हम देखते हैं कि इसके एक ओर संबोधकरूप में कोई वक्ता अथवा लेखक होता है, जो किसी ‘संदेश’ को सप्रेंषित करता है और दूसरी ओर संबोधक रूप में कोई श्रोता अथवा पाठक होता है, जो उस संदेश को ग्रहण करता है।
बधिर और गूंगे मनुष्य अपने विचार सकेंतों से प्रकट करते हैं। बच्चा केवल रोकर अपने इच्छा जाहिर करता है। कभी-कभी केवल मुख की चेष्टा से ही मनुष्य के विचार प्रकट हो जाते हैं। कुछ सकेंतों को लोग ठीक-ठीक नहीं समझ सकते और ना ही इसे सब विचार ठीक-ठीक प्रकट हो सकते हैं। इसलिए, इस प्रकार की सांकेतिक भाषाओं से समाज का काम नहीं चलता। इसी प्रकार, पशु-पक्षी आदि भी जो बोली बोलते हैं, उससे दखु , सखु , भय आदि मनोविकार के सिवाय और कोई बात नहीं की जा सकती। केवल मनुष्य की भाषा से ही सब विचार भलीभांति प्रकट होते हैं, इसलिए व्यक्त भाषा कहलाती है और दूसरी भाषाएं या बोलियां अव्यक्त कहलाती हैं।
एक समावेशी कक्षा में भाषा को सही से सीखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण शिक्षण प्रक्रिया होती है। और इसलिए यह शिक्षक पर पूर्णतः निर्भर करता है कि वह किस विधि और सूत्र का प्रयोग कर कक्षा में विविध छात्रों को एक साथ शिक्षा देता है।
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